New MCC Laws: कैच आउट होने पर नया बैट्समेन ही खेलेगा पहली गेंद, मॉकडिंग का तरीका भी रन आउट में शामिल, आखिर हैं क्या ये नए नियम?

New MCC Laws: कैच आउट होने पर नया बैट्समेन ही खेलेगा पहली गेंद, मॉकडिंग का तरीका भी रन आउट में शामिल, आखिर हैं क्या ये नए नियम?

New MCC Laws: क्रिकेट में नए रूल्स के मुताबिक किसी बैट्समेन के कैच आउट होने पर नए बल्लेबाज को ही अब पहली गेंद खेलनी पड़ेगी। (MCC announce new code of laws) यदि कोई बल्लेबाज ओवर की आखिरी गेंद पर ही कैच आउट होता है तो नए बैट्समेन को मिलेगी स्ट्राइक। जानिए और क्रिकेट के नियमों में क्या बदलाव हुआ है।

New MCC Laws: अब क्रिकेट प्रेमियों को मैदान पर कुछ नियम बदले हुए दिखेंगे। (what is new mcc law?) जी हां! मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब ने कैच आउट और मांकड़िंग से जुड़े रूल्स में बदलाव किया है। साथ ही बॉल पर सलाइवा के इस्तेमाल पर परमानेंट्ली बैन लगा दिया गया है। (MCC announce new code of laws) ऐसे में अब किसी बल्लेबाज के कैच आउट होने पर नए बैट्समेन को ही को ही पहली गेंद खेलनी होगी।

इसी तरह मांकड़िंग को भी अब रन आउट का हिस्सा बना दिया गया है और इसी तरीके से आउट होने वाले बैट्समेन को रन आउट माना जाएगा। बता दें कि मांकड़िंग का नियम हमेशा से ही विवादों में रहा है। क्योंकि इसे खेल भावना के वीपरीत माना जाता रहा है। अब इसे रन आउट में शामिल करने पर गेंदबाजों को इस तरीके से विकेट लेने में आसानी होगी।

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क्या है कैच आउट का नया नियम? (Batters returning when Caught)
कैट आउट के नए नियम के मुताबिक अब किसी बल्लेबाज के कैच आउट होने के बाद हमेशा नए बल्लेबाज ही पहली गेंद खेलेगा। (MCC announce new code of laws) पुराने नियम में जब कोई बैट्समेन कैच आउट होता था तो रन दौड़ने की कोशिशों में क्रॉस कर जाते थे और दूसरे छोर पर पहुंचने वाला बल्लेबाज अगली गेंद खेलता था, नया बैट्समेन नॉन स्ट्राइक पर रहता था, लेकिन अब किसी भी परिस्थिति में कैच आउट होने पर नए बल्लेबाज को ही पहली गेंद खेलनी होगी। ऐसे में भले ही दोनों रन दौड़ते वक्त एक दूसरे को क्रॉस कर गए हों। यदि कोई बैट्समेन ओवर की अंतिम गेंद पर ही कैच आउट होता है तो दूसरे छोर पर खड़ा बल्लेबाज अगले ओवर की पहली गेंद खेलने का हकदार होगा।

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मांकडिंग के नियम में क्या बदला और ये कहां से आया? (Mankading rule in cricket)
जब नॉन स्ट्राइक पर खड़ा बैट्समेन बॉलर के बॉल डालने से पहले क्रीज से बाहर निकल जाता है तो गेंदबाज चालाकी से गिल्लियां उड़ाकर उसे आउट कर सकता है। इसी को मांकड़िंग कहा जाता है। पहले मांकड़िंग के नियम को खेल भावना के विरुद्ध माना जाता था और गेंदबाज के इस तरह विकेट लेने पर उसकी कड़ी आलोचना होती थी। लेकिन नए नियम में इस तरह के रनआउट को खेल का हिस्सा बना दिया गया है। ऐसे में मांकड़िंग फॉर्मेट में आउट होने वाले बल्लेबाज को रन आउट करार दिया जाएगा। आपको बता दें कि अभी तक स्पिन गेंदबाज ही इस तरीके से किसी बल्लेबाज को रन आउट कर पाते थे।

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यहां ये भी बताना जरूरी है कि साल 2019 में आर अश्विन ने आईपीएल के दौरान जॉस बटलर को मॉकडिंग के तहत आउट कर नए विवाद को जन्म दे दिया था। उस दौरान उनकी खूब आलोचना हुई थी।, लेकिन उस दौरान आर अश्विन ने सफाई दी थी कि उन्होंने बटलर को मैच के दौरान पहले वॉर्निंग भी दी थी, लेकिन जब दो तीन बार उन्होंने ऐसा किया तो आर अश्विन ने उन्हें आउट कर दिया।
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मांकडिंग नियम क्या है?
जब बॉलर बॉल फेंकने से पहले नॉन स्ट्राइकिंग एंड का बैट्समेन क्रीज से बाहर निकल जाता है और बॉलर अपना बॉलिंग एक्शन रोककर गिल्लियां गिरा देता है तो इसे मांकडिंग कहा जाता है। IPL में इस तरीके से आउट होने वाले पहले बैट्समेन जोस बटलर थे। जिन्हें आर अश्विन ने आउट किया था।
मांकडिंग नाम कैसे पड़ा?
सबसे पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य एक टेस्ट मैच के दौरान भारत के वीनू मांकड ने ऑस्ट्रेलिया के विल ब्राउन को इसी तरह से आउट किया गया था। इसके बाद से वीनू के सरनेम के पर ही इस तरीके से आउट किए जाने को ‘मांकडिंग’ कहा जाने लगा।

क्रिकेट में यह नियम माना तो जाता है, ले​किन इसे लेकर क्रिकेट में दो धड़े हैं। कुछ पूर्व क्रिकेट एक्सपटर्स इसके पक्ष में हैं तो कुछ का तर्क है कि इस तरह से आउट किए जाना खेल भावना को विपरित है।

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सलाइवा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध का नियम क्या है? यानि क्रिकेट लॉ 41.3 - नो सलाइवा (No saliva)

MCC ने अब क्रिकेट में गेंद को चमकाने के लिए थूक या मूंह के सलाइवा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। बता दें कि पहले कोविड 19 के संक्रमण फैलने के कारण इसे लागू किया गया था। गेंदबाज या अन्य खिलाड़ी गेंद को चमकाने या धूल हटाने के लिए पसीने और सलाइवा का इस्तेमाल करते आ रहे थे। लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस तरह से गेंद चमकाने पर बैन लगा दिया गया था।

अब नए नियम के तहत थूक और पसीने का इस्तेमाल गेंद चमकाने में करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पहले खिलाड़ी गेंद पर लार का प्रयोग करने के लिए शुगर प्रोडक्ट का यूज करते आ रहे थे। ऐसे में इसे अनुचित की श्रेणी में रखा गया है। अभी तक ये माना जाता था कि सलाइवा के यूज से गेंद को स्विंग अच्छी मिलती है। लेकिन नए प्रतिबंध के बाद खिलाड़ी ऐसा कुछ भी नहीं कर पाएंगे।

MCC क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?

आपको बता दें कि MCC पूरी दुनिया में क्रिकेट से जुड़े नियमों की संरक्षक है। इसकी स्थापना सन 1787 में की गई थी। नियमों में बदलाव यही संस्था करती है। क्लब के 18 हजार पूर्णकालिक और पांच हजार एसोसिएट सदस्य हैं। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ही लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान का रख रखाव भी करती है।

MCC (Marylebone Cricket Club) पहले इंग्लैण्ड और वेल्स और पूरी दुनिया में क्रिकेट को कंट्रोल करने वाली इकाई थी। 1993 में इसके कई इंटरनेशनल वर्क्स को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउन्सिल (ICC) को ट्रांसफर कर दिया गया और इसके इंग्लिश एडमिनिस्ट्रेशन को उसी समय टेस्ट एंड कंट्री क्रिकेट बोर्ड (TCCB) को ट्रांसफर कर दिया गया। अब एमसीसी केवल नियमों का संरक्षक एवं खेल की भावना का सरंक्षक ही कर रही है।
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