मिट्टी में ढेर करने वाला मुख्तार मिला मिट्टी में, किया गया सुपुर्द-ए-खाक, जानें कैसे माफिया से बना नेता

अपराध और राजनीति का मुख्तार अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया। उन दिनों मुहम्मदाबाद फाटक पर काफिला पहुंचते ही सरकारी मशीनरियों से लेकर हर कोई सकते में आ जाता था। सलाखों के पीछे से भी कभी उसका साम्राज्य कमजोर नहीं पड़ा।
मिट्टी में ढेर करने वाला मुख्तार मिला मिट्टी में, किया गया सुपुर्द-ए-खाक, जानें कैसे माफिया से बना नेता
मिट्टी में ढेर करने वाला मुख्तार मिला मिट्टी में, किया गया सुपुर्द-ए-खाक, जानें कैसे माफिया से बना नेता

अपराध और राजनीति का मुख्तार अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया। उन दिनों मुहम्मदाबाद फाटक पर काफिला पहुंचते ही सरकारी मशीनरियों से लेकर हर कोई सकते में आ जाता था।

सलाखों के पीछे से भी कभी उसका साम्राज्य कमजोर नहीं पड़ा। 25 अक्तूबर 2005 को खुद जमानत तुड़वाकर जेल पहुंचा मुख्तार अंसारी अब शुक्रवार की देर रात 19 वर्ष बाद ताबूत में घर आया।

जेल से पहुंचा अपराध के शिखऱ पर

गाजीपुर, वाराणसी, लखनऊ, आगरा और बांदा सहित कई जेल में बंद मुख्तार अपराध के शिखर तक पहुंचा था।

स्थिति यह थी कि प्रदेश ही नहीं, गैर प्रांतों के कारागार के दरवाजे उसके एक इशारे पर खुल जाया करते थे।

पूर्वांचल से बिहार तक के रेलवे, स्क्रैप, काेयला, रेशम आदि के ठेके-पट्टों पर फैसला जेल में ही होता था।

उसने पूर्वांचल के कई जिलों में गैरकानूनी तरीके से आंध्र प्रदेश से मछली मंगवाकर बेचने का बड़ा कारोबार भी स्थापित कर लिया था। गाजीपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा करके वेयरहाउस और होटल बनवाया था।

मऊ से तीन बार लगातार 2002 से 2017 तक विधायक रहा, लेकिन इस दौरान वह जेल से बाहर नहीं आया।

जेल में रहते हुए उसने चुनाव लड़ा और विधायक बना था। सत्ता बदलते ही मुख्तार पर कानूनी शिकंजा कसा तो कई मामलों में सजा भी हुई।

2004 में कराया कृष्णानंद की हत्या

गाजीपुर में मनोज सिन्हा के बढ़ते वर्चस्व और कृष्णानंद की जीत से मुख्तार खेमा बौखला गया। फरवरी 2004 में कृष्णानंद के खास रहे अक्षय राय उर्फ टुनटुन की गाजीपुर में हत्या कर दी गई।

26 अप्रैल 2004 को कृष्णानंद के करीबी झिनकू की, फिर भाजपा कार्यकर्ता शोभनाथ राय की हत्या कर दी गई।

27 अप्रैल 2004 को दिलदारनगर में रामऔतार की हत्या हुई। लोस चुनाव के बाद बाराचवर विकास खंड मुख्यालय पर कृष्णानंद के करीबी अविनाश सिंह पर फायरिंग की गई। नवंबर 2005 में कृष्णानंद और छह अन्य को मौत के घाट उतार दिया गया था।

बड़े भाई की सियासी हार नहीं पचा पाया था मुख्तार202

2022 में मुहम्मदाबाद विधानसभा से अफजाल अंसारी को हार का सामना करना पड़ा था। भाई की हार पर मुख्तार बौखला उठा।

चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक कृष्णानंद राय एवं उन लोगों को ठिकाने लगाने का फैसला किया। इसी का नतीजा रहा कि फरवरी 2004 से नवंबर 2005 के बीच कृष्णानंद और उनके खेमे के 15 लोगों की हत्या हुई थी।

26 वर्षों का रहा मुख्तार का सियासी सफर

मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर वर्ष 1996 में पहली बार मऊ के सदर विधानसभा चुनाव जीता था।

इसके बाद 2002 एवं 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। 2012 में कौमी एकता दल का गठन किया और चुनाव लड़कर जीत हासिल की।

2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से टिकट की मांग की, लेकिन नहीं मिल सका। इसके बाद कौमी एकता दल से ही चुनाव मैदान में उतरा और जीत हासिल की।

2022 के चुनाव से मुख्तार ने दूरी बना ली और अपनी राजनीतिक विरासत बेटे अब्बास अंसारी को सौंप दी।

हार्ट अटैक से माफिया की मौत

तकरीबन ढाई साल से मुख्तार यूपी के बांदा जेल में बंद था। गुरुवार की देर रात हार्ट अटैक की वजह से उसकी मौत हो गई।

बता दें कि मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था।

जहां 9 डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब 10: 30 पर प्रशासन ने मुख्तार की मौत की पुष्टि की।

गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी मौत के पर पहुंचे और करीब साढ़े आठ बजे के आसपास उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया था।

जहां दो घंटे तक उसका इलाज चला। उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां रात साढ़े दस बजे के आसपास उसकी मौत हो गई।

मुख्तार तीन दिनों से बीमार चल रहा था। बताया जा रहा है कि मुख्तार को दिल का दौरा पड़ा है। दो दिन पहले 26 मार्च को मुख्तार ने जेल प्रशासन से पेट में दर्द की शिकायत की थी।

इसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने ज्यादा खाने (ओवरईटिंग) व कब्ज का इलाज किया गया और 14 घंटे बाद उसी दिन देर शाम उसे वापस मंडलीय कारागार भेज दिया गया था।

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