सरकार क्यों जनता को अमीर बनने के सब्जबाग दिखाने वाली पिरमिड स्कीम्स पर बैन लगा रही? जानिए चेन बिजनेस सिस्टम के बारे में वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

सरकार क्यों जनता को अमीर बनने के सब्जबाग दिखाने वाली पिरमिड स्कीम्स पर बैन लगा रही? जानिए चेन बिजनेस सिस्टम के बारे में वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

.... तो इतना पैसा कमा लेंगे.... जो आप अपनी 25 से 30 साल की नौकरी में नहीं कमा पाएंगे... घर बैठे आपकी पैसिव इनकम आती रहेगी.... ​मल्टि लेवल मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों में काम करने वाले लोग अन्य लोगों को कम समय में बेशुमार दौलत के सब्जबाग कुछ ऐसे ही दिखाते हैं।

हमारा ये प्रोडक्ट है.... ये कंपनी अच्छा ग्रो कर रही है... यदि आप इसके प्रोडक्ट्स को खरीदेंगे तो आपको मेंबर होने के नाते इतना डिस्काउंट मिलेगा... वहीं आप अपनी डाउनलाइन में इतने लोग जोड़ेंगे तो आपको इतना कमिशन मिल जाएगा कि आप कंपनी में निवेश की गई राशि तो वसूल ही लेंगे... साथ ही दो या तीन साल काम कर ​इतने लोग जोड़ लिए.... तो इतना पैसा कमा लेंगे.... जो आप अपनी 25 से 30 साल की नौकरी में नहीं कमा पाएंगे... घर बैठे आपकी पैसिव इनकम आती रहेगी.... ​मल्टि लेवल मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों में काम करने वाले लोग अन्य लोगों को कम समय में बेशुमार दौलत के सब्जबाग कुछ ऐसे ही दिखाते हैं। लेकिन ये कंपनियां अब ऐसा नही कर सकेंगी...। क्योंकि केंद्र सरकार ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन को लेकर बड़ा एक्शन लिया है।

इसमें सरकार ने ग्राहकों को सीधे सामान बेचने वाली यानि डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। इसमें कंप​नियों की पिरामिड चैन और मनी सर्क्यूलेशन जैसी पॉलिसी पर लगाम लगा दी गई है। ऐसे में अब इन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर नए नियमों का पालन करना होगा।

वहीं डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को अपने रिटेलर्स की ओर से बेचे गए प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज को लेकर आने वाली कंप्लेन्स को जवाबदेह बनाया जाएगा इस तरह की प्रमुख कंपनियों की बात करें तो इसमें टपरवेयर, एमवे और ओरिफ्लेम जैसी कई कंपनियों की गिनती होती है। वहीं अब इन कंपनियों ने सरकार के नए नियमों का समर्थन किया है। कंपनियों का कहना है कि इससे इंडस्ट्रीज को वैधता मिल पाएगी।

कौन आएंगे इस दायरे में?
मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स कंज्यूमर प्रोटेक्शन (डायरेक्ट सेलिंग) नियम, 2021 की अधिसूचना के तहत नए नियम के दायरे में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सीधे कस्टमर्स को सामान बेचने वाले रिटेलर्स भी आएंगे। यानि ई-कॉमर्स साइट्स पर जिनके सेलर्स एकाउंट हैं, वे भी इसी नियम के दायरे में आएंगे।

राज्य सरकारों को भी नकेल कसने के लिए बनाना होगा सिस्टम

वहीं नए रूल्स में स्टेट्स गवर्नमेंट्स को डायरेक्ट सेलिंग से जुड़ी यूनिट की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक सिस्टम बनाना होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार पहली बार डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में लाकर नए नियम बनाए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार नियमों की पालना नहीं होने पर इस तरह की कंपनियों पर कड़ा एक्शन भी लिया जाएगा।

ऐसे में अब नए रूल्स के अनुसार डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां और डायरेक्ट रिटेलर्स पिरामिड पॉलिसी को बढ़ावा नहीं दे सकेंगी और न ही वे किसी भी व्यक्ति को सीधे बिक्री कारोबार का हिस्सा बनने के लिए लुभा सकेंगे। वर्तमान में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां बिक्री के लिए मास लेवल पर लोगों को प्रॉफिट के सब्सबाग दिखा कर अपने प्लान से जोड़ने की करती आ रहीं थी। ऐसे में अब इन डायरेक्ट सेलिंग बिजनेस के नाम पर मनी सर्कूलेशन जैसी पॉलिसी पर भी पाबंदी लगेगी।

पिरामिड स्कीम क्या है? इस पर सख्ती क्यों?

पिरामिड स्कीम मल्टी लेवल मार्केंटिंग से ठी अलग होती है। इस स्कीम में नए सदस्यों को जोड़ने के लिए कमीशन देना होता है। इसे अधिकतर देशों में अवैध घोषित कर दिया गया है। ज्यादातर पिरामिड स्कीम में पैसा कमाने और लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए मल्टी लेवल मार्केटिंग में शामिल करने की कोशिश भी की जाती है।

ऐसी कंपनियां लोगों को झांसा देकर मल्टी लेवल मार्केटिंग में खुद कारोबार करना बताती है। फिर लोगों से लाखों करोड़ रुपये जमा कर गायब हो जाती हैं। बता दें कि पिरामिड स्कीम वो स्कीमहै जिसमें निवेशकों को कम निवेश में भारी रकम वापस देने का लालच देकर धोखाधड़ी की जाती है।

इस स्कीम में जब तक पुराने लोगों को पैसा मिलता रहता है, जब तक कि नए लोगों को उचित दर पर पैसा वापस मिलता रहता है। लेकिन जैसे ही नए लोगों की संख्या कम होने लगती है या लोग जुड़ना बंद कर देते हैं, तो कंपनी का डाउन फॉल शुरू हो जाता है और संबंधित पिरामिड स्कीम संचालक रातों-रात गायब हो जाता है।

इस तरह की पिरामिड स्कीम लॉन्ग टर्म तक नहीं रह पाती हैं और सीमित समय में ही ये बंद हो जाती है।

हालांकि डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के ऑर्गनाइजेशन आईडीएसए ने इसका समर्थन किया है। आईडीएसए के अनुसार सरकार के अस एक्शन से इस क्षेत्र को ताकत मिलेगी। आईडीएसए के मुखिया रजत बनर्जी ने कहा कि हम दो साल से सरकार को इस बारे में सुझाव देते रहे थे। अब इस बिजनेस में काफी पारदर्शिता आएगी।

डायरेक्ट सेलिंग कंपनी क्या होती है?
डायरेक्ट सेलिंग स्तर की कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स और सर्विसेज शॉप्स के माध्यम से बेचने के बजाय कंज्यूमर्स को सीधे ही बेचती हैं। इस तरह की सेलिंग इंडिपेंडेंट सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स के माध्यम से पर्सन-टू-पर्सन की जाती है। एमवे, ओरिफ्लेम, एवॉन और मोदीकेयर इंडिया कुछ इसी तरह की कुछ फेमस कंपनियां हैं जो डायरेक्ट सेलिंग प्रॉसेस से कंज्यूमर तक अपने उत्पाद पहुंचाती हैं।
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इन्हें ऑपरेट कौन करता है?
डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां इंडिपेंडेंट सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करती हैं। इसी नेटवर्क का प्रत्येक सदस्य अपने पर्सनल कॉन्टेक्ट्स का यूज कर उन्हें प्रोडक्ट्स बेचता है। बता दें कि इस पूरे नेटवर्क में काम करने वालों में कोई भी व्यक्ति कंपनी काे ऑनरोल एंप्लॉई नहीं होता है। ये सभी सेल्फ एंप्लॉयड माने जाते हैं और कमिशन बेस पर काम करते हैं। वर्तमान में डायरेक्ट सेलर्स नेट और सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से भी प्रोडक्ट्स बेचने का काम करते हैं।

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सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स की कमाई कैसे होती है?

डायरेक्ट सेलिंग कंपनीज दो तरह की हो सकती हैं एक तो सिंगल लेवल मार्केटिंग (एसएलएम) और दूसरी होती है मल्टिलेवल मार्केटिंग (एमएलमए)। एसएलएम स्तर की कंपनियां अपने रिप्रेजेंटेटिव्स को उनकी पर्सनल बिक्री पर इनकम का एक हिस्सा कमिशन देती हैं।

जबकि एमएलएम में रिप्रेजेंटेटिव दूसरे लोगों को जोड़कर अपना डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बनाते हैं। ये लोग उनके पर्सनल कॉन्टेक्ट्स हो सकते हैं। इन रिप्रेजेंटेटिव्स को उनके रिक्रूट्स की सेल्स पर कमिशन मिलता है और यही भारत में डायरेक्ट सेलिंग का सबसे प्रसिद्ध मॉडल है।

इस उद्योग को रेग्युलेट करने वाला कानून क्या कहता है? इस पर नए नियम लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के लिए अभी तक किसी तरह की कोई क्लीयर पॉलिसी फ्रेमवर्क या रेग्युलेशन नहीं था। अब तक सीधी बिक्री करने वाली ये कंपनियां मौजूदा नियमों के तहत ही कवर हो रहीं थी। इसमें क्लैरिटी नहीं आ रही थी, वहीं इसकी परिभाषा को लेकर काफी दिक्कतें सामने आ रही थी। यही कारण है कि सरकार ने इस पर नकेल कसने के लिए सरकार को नए नियम लाने पड़े।
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डायरेक्ट सेलिंग उद्योग अक्सर विवादों में क्यों रहा?

दरअसल कई एमएलम या डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों द्वारा डायरेक्ट सेलिंग असोसिएशन ऑफ द यूएस व प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन बैनिंग ऐक्ट, 1978 के तहत बनाए गए नियमों का पालन नहीं कर रहीं थीं।

जबकि नियम तो ये कहता है कि चेन का कोई भी सदस्य नया सेल्सपर्सन रिक्रूट करने या रेफर करने मात्र से कमाई नहीं कर सकता। ऐसे में यदि ऐसी कंपनी के किसी सदस्य को सिर्फ रिक्रूटमेंट से ही अर्निंग हो रही है तो ये बिजनेस चेन एक पोंजी स्कीम में तब्दील हो जाती है।

पोंजी स्कीम वही स्कीम है जिसमें लोगों की इनकम तब बढ़ती है, जब नए लोग इसमें जुड़ते हैं। यानि पिरामिड का बेस बनता है। वहीं नियम के हिसाब से रिक्रूटर को इनकम तभी होनी चाहिए, जब वो स्वयं उत्पाद बेचे। इसमें बि​क्री से नई आर्थिक गतिविधि शुरू होती है और बिकने वाले उत्पाद के कमीशन को चेन में शामिल दूसरे लोगों में बांटा जा सकता है।

बहरहाल सरकार की ओर से डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को लेकर जारी नई गाइडलाइन ऐसी कंपनियों में कितनी पारदर्शिता ला पाएंगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन आमजन को आर्थिक घाटे से बचाने के लिए सरकार का ये कदम जरूरी भी था।

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