ग्लोबल टाइम्स में फिर मोदी की वाह-वाह, विपक्ष पर रार, आखिर क्या है चीनी चाल

आखिर क्या कारण है की चीन का मुखपत्र माने जाने वाला अंग्रेजी अखबार ग्लोबल टाइम्स पीएम मोदी की तारीफ कर रहा है. क्या भारत का चीन से आयात करना इसके पीछे कारण है?
ग्लोबल टाइम्स में फिर मोदी की वाह-वाह, विपक्ष पर रार, आखिर क्या है चीनी चाल

राहुल गांधी और सोनिया गांधी

हाल ही में भारत के विपक्ष पर चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स काफी मुखर है. भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाला अंग्रेज़ी डेली न्यूज पेपर ग्लोबल टाइम्स काफ़ी सक्रिय रहता है. कई बार लिखे लेख, तस्वीरे, विडियो और टिप्पणियों से भारत के सोशल मीडिया पर बहस होना शुरू हो जाता है. भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगती है. 2022 के पहले दिन यानि एक जनवरी को ग्लोबल टाइम्स ने एक वीडियो ट्वीट किया.

ट्विट किए वीडियो को ग्लोबल टाइम्स ने गलवान घाटी का बताया. इस विडियो में चीनी आर्मी के सैनिक मंदारिन में कहते हुए दिख रहे थे-हम एक इंच भी ज़मीन नहीं छोड़ेंगे. जिसके बाद दैनिक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने घाटी में चीनी सैनिकों की राष्ट्रध्वज लिए एक फोटो भी ट्वीट की थी.

<div class="paragraphs"><p>राहुल गांधी और सोनिया गांधी</p></div>
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जिसके बाद भारत में विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया. इस विवाद के बीच मंगलवार को भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई ने गलवान में तिरंगा लिए भारतीय सैनिकों की तस्वीर ट्वीट की. ट्वीट हुई फोटो को मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने भारतीय सेना के पराक्रम के तौर पर पेश करते हुए पोस्ट किया था. 1

अब बुधवार को ग्लोबल टाइम्स ने इस पूरे मामले पर एक संपादकिय प्रकाशित किया. जिसमें उन्होने लिखा, ‘’नए साल के पहले दिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन और भारत के सैनिकों ने 10 ठिकानों पर एक दूसरे को मिठाई दी थी.’’

‘’20 महीने पहले दोनों देशों के बीच सरहद पर शुरू हुए गतिरोध के बाद नए साल पर दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दी थीं. मीडिया में इसे चीन और भारत के बीच स्थिर संबंध के तौर पर देखा गया. दोनों देशों के सैनिकों की इस पहल से भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की आगामी बैठक के लिए अच्छा माहौल बना था.''

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ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि, ''सरहद पर भारत और चीन के सैनिक त्योहारों के मौक़े पर पुरानी परंपरा के तहत एक दूसरे को मिठाई देते रहे हैं. पिछले 2 सालों से सीमा पर गतिरोध के कारण मिठाई देने का रिवाज बंद था. वही 2022 की शुरुआत में दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे को मिठाई देकर शुभकामनाएं दीं तो भारत में विपक्षी पार्टीयों को यह पसंद नहीं आ रहा. मिठाई देने वाली बात पर एक चीनी नागरिक लिखता है कि गोली से बढ़िया है कि एक दूसरे को मिठाई देंना. लेकिन दुर्भाग्य से भारत में विपक्षी पार्टियां इसे मुद्दा बना रही है. मौजूदा विपक्षी पार्टीयों ने इसे मोदी सरकार का चीन के सामने झुकने की तरह देखा.''

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भारत में मिठाई को बनाया जा सकता है बड़ा मुद्दा –

ग्लोबल टाइम्स लिखता है, ''भारत में मिठाई को भी बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है. मिठाई देने को भारत और चीन के बीच स्थिर होते रिश्ते के रूप में देखा जा रहा लेकिन समय-समय पर इसे भी बाधित किया जाता रहा है. वर्तमान में भारत की घरेलू राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है और विपक्ष केवल विरोध करने के लिए ही विरोध करता रहा है.’’

‘’लेकिन ये मोदी सरकार की विदेश नीति को प्रभावित करने में सक्षम नहीं हुए हैं. विपक्ष भारत में चीन विरोधी खेमा तैयार करने में कामयाब रहा है. अगर भारत की घरेलू राजनीति का अमेरिकीकरण हो जाएगा, कुछ राजनेता अपने फ़ायदे के लिए भारत-चीन संबंधों पर कीचड़ उछालते रहेंगे या फिर चीन विरोधी खेमा भी बना लेते हैं, तो इससे भारत की महाशक्ति बनने की तमन्ना अधूरी ही रह जाएगी. भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 तक भारत को पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है, जो दिखाता है कि भारत की प्राथमिकता विकास है न कि युद्ध.''

सरहद पर तनाव के बावजूद व्यापार पहुंचा 100 अरब डॉलर पार –

सरहद पर तनाव के बावजूद भी भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते दिनो-प्रतिदिन मजबूत होते जा रहे है. साल 2021 की बात करें तो इस साल भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर गया है. लेकिन दोनों देशों में इस पर ज्यादा चर्चा नहीं है क्योंकी कारण साफ है, पूर्वी लद्दाख़ में सैन्य गतिरोध के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं. समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, साल 2001 में 1.83 अरब अमेरिकी डॉलर से शुरू हुआ द्विपक्षीय व्यापार साल 2021 के 11 महीनों के अंदर 100 अरब डॉलर का हो गया. यह दोनों देशों के व्यापार के लिए एक बड़ा मौक़ा है क्योंकि दोनों देशों ने अपने व्यापार के लिए रिश्तों को बेहतर किया है.

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