आखिर ऐसा क्या हो गया कि पहली बार वायुसेना के C-130J विमान ने कारगिल की हवाईपट्टी पर Mid Night में कराई लैंडिंग, जाने पूरा मामला

Indian Air Force: भारतीय वायुसेना ने इतिहास रच दिया। इजरायल वायु सेना द्वारा किए गए आपरेशन थंडरबोल्ट की तरह अंजाम दिया।
आखिर ऐसा क्या हो गया कि पहली बार वायुसेना के C-130J विमान ने कारगिल की हवाईपट्टी पर Mid Night में कराई लैंडिंग, जाने पूरा मामला
आखिर ऐसा क्या हो गया कि पहली बार वायुसेना के C-130J विमान ने कारगिल की हवाईपट्टी पर Mid Night में कराई लैंडिंग, जाने पूरा मामला

Indian Air Force: भारतीय वायुसेना ने इतिहास रच दिया। इजरायल वायु सेना द्वारा किए गए आपरेशन थंडरबोल्ट की तरह अंजाम दिया।

भारतीय वायुसेना ने बिना किसी भी राडार की पकड़ में आए C-130J सुपर हरक्यूलस विमान करगिल की हवाईपटटी पर उतार दिया। भारतीय वायु सेना के देर रात किए गए इस ऑपेरशन में गरुड़ कमांडों की भी एक टुकड़ी थी।

दुनिया भर की वायुसेना की किताबों में इसे टरेन मास्किंग कहते हैं। यह एक ऐसी रणनीति है, जिसके माध्यम से वायुसैनिक विभिन्न उंचाई, नदी, प्राकृतिक संसाधनों और राडार मुक्तक्षेत्र का का प्रयोग करते हुए राडार को चकमा देते हैं और अपना लक्ष्य भेदते हैं।

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर की गई एयरस्ट्राइक आपरेशन बंदर में भी इसका इस्तेमाल किया गया था।

कारगिल की हवाईपट्टी पर आधी रात में कराई लैंडिंग

भारतीय वायुसेना ने अपने इस विशिष्ट अभ्यास का वीडियो भी जगजहिर किया है। भारतीय वायुसेना ने इस अभ्यास की जानकारी देते हुए कहा है कि पहली बार वायुसेना के C-130J विमान ने कारगिल की हवाईपट्टी पर आधी रात को लैंडिंग कराई है। इस अभ्यास के दौरान टरेन मास्किंग को भी अंजाम दिया गया।

इसे वायुसेना के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। चारों तरफ पहाड़ो से घिरे इस इलाके में बर्फबारी बड़ी चुनौती है। इसका सबसे बड़ा लाभ देश के दुश्मन चीन और पाकिस्तान से निपटने में मदद मिलेगी। यह रणनीतिक रूप से बहुत ही पॉवरफुल कदम है। इस विमान को आगरा एक्सप्रेस-वे और दौलव वेग ओल्डी पर भी लैंड कराया जा चुका है। कश्मीर में आई बाढ़ और नोटबंदी में इसने बहुत बेहतर कार्य किया गया।

Operation Thunderbolt  जिसकी तरह कारगिल में हुआ अभ्यास

4 जुलाई 1976 को युगांडा के एंतबे हवाईअडडे पर हुई यह सैन्य कार्रवाई इज़रायली इतिहास की सबसे कठिन कार्रवाई में से एक है।

फिलिस्तीन के आतंकियों ने यहूदियों से भरे एक विमान का अपहरण कर लिया था। इसे युगांडा के एंतबे हवाईअडडे पर उतारा गया।

यहां से आतंकियों ने इजरायल से 50 आतंकियों को रिहा करने की मांग की। इजरायल को यह मंजूर नहीं था। कई तरीके से बात करने के बाद आपरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई।

इसमें सबसे बड़ी समस्या इज़रायल और एन्तेबे की दूरी थी लेकिन यहीं से तैयारी शुरू हो गई।

मोसाद और इजरायल वायुसेना ने 200 कमांडों के साथ रणनीति बनाई और फिर आपरेशन शुरू हो गया। 4000 किलोमीटर की दूरी पर किए जाने वाले इस आपरेशन की दो चुनौती थी।

राडार और दूसरा तेल। राडार के लिए तो इजरायली वायुसेना ने टरेन मास्किंग का प्रयोग करते हुए बिना राडार में आए लाल सागर ऊपर से होते हुए बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरी।

उड़ान के दौरान ही हवा में ही अन्य विमानों की मदद से तेल भरा। इसके बाद एंतेबे में क्या हुआ यह एक इतिहास है।

 इस आपरेशन की खासियत यह थी कि किसी भी बंदी को कोई नुकसान नहीं हुआ। सभी आतंकी और युगांडा के कई सैनिक मारे गए।

इजरायल का सिर्फ एक ही सैनिक शहीद हो गया और सैनिक का नाम योनातन नेतन्याहू था। वह इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाई थे।

करगिल में 6 जनवरी की आधी रात को किया गया यह अभ्यास इजरायल के आपरेशन थंडरबोल्ड की तरह ही है।

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