Election 2022: तीन राज्य...तीन विजेता; पहली बार EVM बेदाग! इस बार नहीं लग रहे आरोप

दिल्ली एमसीडी, गुजरात और हिमाचल के चुनाव परिणाम में तीन अलग-अलग दल विजेता होने से इस बार शायद पहली बार EVM पर किसी दल या राजनेता ने गड़बड़ी या छेड़छाड़ का आरोप नहीं लगाया है। जबकि इससे पहले जो दल या प्रत्याशी हारता था वही EVM पर प्रश्न उठा देता था।
Election 2022: तीन राज्य...तीन विजेता; पहली बार EVM बेदाग! इस बार नहीं लग रहे आरोप

दिल्ली एमसीडी के बाद अब गुजरात और हिमाचल विधानसभा के चुनाव परिणाम भी घोषित हो गए। तीन चुनाव परिणामों में से MCD के नतीजे आम आदमी पार्टी के पक्ष में रहे और गुजरात में BJP का परचम लहरा गया, वहीं हिमाचल में Congress ने जीत हांसिल कर ली है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि मतदान के बाद आए एक्जिट पोल भी पहली बार कुछ ऐसा ही रुझान बता रहे थे।

सीटों की गणना कम ज्यादा जरूर हुई पर प्राय: सभी सर्वे दिल्ली एमसीडी में AAP को और गुजरात में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिलने की घोषणा कर रहे थे। इसी प्रकार हिमाचल में भाजपा-कांग्रेस में टक्कर बताई जा रही थी, लेकिन परिणाम सामने आने के बाद बहुमत कांग्रेस को मिला है। हालांकि भाजपा कुछ ही सीटों से पिछड़ गई।

बड़ी बात यह है कि तीन चुनावी नजीते सामने आने के बाद अब तक किसी भी राजनीतिक दल या बडे़ नेता ने इलेक्शन वोटिंग मशीन (EVM) पर प्रश्न नहीं उठाया है। जबकि पिछले जितने भी चुनाव हुए उनमें किसी न किसी बहाने EVM से छेड़छाड़ के आरोप लगते रहे हैं।

शायद इस बार यह दोषारोपण इसलिए नहीं हुआ कि तीनों जगह के चुनाव परिणाम में अलग-अलग पार्टियों को विजय हांसिल हुई है, ऐसे में EVM पर प्रश्न उठाकर भाजपा या केंद्र सरकार को घेरने का कोई कारण शायद किसी के पास नहीं है। हालांकि हार के बाद प्रत्‍याशी के ईवीएम पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने का तरीका सालों से चला आ रहा है।

कब-कब लगे EVM से छेड़छाड़ के आरोप

देश में पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल केरल में 1982 में हुए विधानसभा चुनाव में किया गया था। केरल की परावुर विधानसभा सीट के 50 मतदान केंद्रों में वोटिंग के लिए जब इसे रखा गया तो लोगों के बीच चर्चा का विषय भी बना और पहला विवाद भी यहीं से शुरू हुआ।

  • 19 मई, 1982 को परवूर विधानसभा में चुनाव आयोजित किए गए। बड़ा मुकाबला राजनीतिक दल सीपीआई (CPI) के प्रत्‍याशी सिवन पिल्लई और कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष एसी जोज़ के बीच था। चुनाव के दिन परवूर विधानसभा क्षेत्र के 84 में से 50 बूथ पर ईवीएम के जरिए मतदान कराया गया। नतीजों में सीपीआई के सिवन पिल्‍लई ने कांग्रेस के एसी जोज़ को हरा दिया। इस हार पर कांग्रेस ने ईवीएम पर सवाल उठाए और मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

  • उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाने के बाद ईवीएम चर्चा में आई। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ईवीएम फ्रॉड का मुद्दा उठाया है। सोमवार को वोटिंग खत्म होने के बाद एग्जिट पोल जारी किए गए थे जिसके हिसाब से भारतीय जनता पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी कर रही थी। ऐसे में बीजेपी का कहना है कि अपनी संभावित हार को देखते हुए अखिलेश यादव बौखला गए हैं और इसलिए ईवीएम पर दोष मढ़ने लगे हैं।

  • साल 2009 में ही ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजू जनता दल की फिर से सरकार बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस के नेता जेबी पटनायक ने भी ईवीएम पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में नवीन पटनायक की सरकार बनने के पीछे ईवीएम मशीन ही है।

  • कांग्रेस के कद्दावर नेता और असम के पूर्व सीएम तरुण गोगोई ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का जिम्मेदार ईवीएम मशीन को बताया था। राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव और टीएमसी की चीफ और बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता को संदिग्ध बताया था।

  • दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी ने तो राज्य विधानसभा में ईवीएम हैक का ट्रायल भी पेश किया था। अरविंद केजरीवाल ने कई बार ईवीएम की जगह पर बैलट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग की है। उत्तर प्रदेश में साल 2017 में बीजेपी की जीत के बाद मायावती ने भी जोर-शोर से ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी को बीजेपी ने नहीं बल्कि ईवीएम ने हराया है।

  • बीजेपी के साल 2014 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद से तकरीबन हर चुनाव में विपक्षी दल यह आरोप लगाते हैं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। कई बार यह दावा भी किया गया कि ईवीएम में किसी भी पार्टी को वोट देने पर बीजेपी को वोट जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की भी कभी पुष्टि नहीं हो पाई है।

  • साल 2009 में जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को सत्ता नहीं मिली और कांग्रेस नीत यूपीए को बहुमत मिल गया, तब भगवा पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ही ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। लालकृष्ण आडवाणी ने तो बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव की किताब 'डेमोक्रेसी ऐट रिस्कः कैन वी ट्रस्ट ऑवर ईवीएम मशीन?' की भूमिका भी लिखी थी। किताब में ईवीएम मशीन के खिलाफ कई सारे सवाल उठाए गए। तब भाजपा ने कई संगठनों की मदद से ईवीएम मशीनों के साथ की जाने वाली कथित धोखाधड़ी को लेकर देशभर में अभियान चलाया था।

चुनाव आयोग को कहना पड़ा, निराशा की अभिव्यक्ति है ईवीएम पर सवाल?

उधर, बार-बार ईवीएम पर प्रश्न उठाए जाने पर चुनाव आयोग को भी यह कहना पड़ा कि अन्य देशों में इस्तेमाल होने वाले ईवीएम से अपने यहां इस्तेमाल होने वाला ईवीएम अलग है। इसे हैक नहीं किया जा सकता है। आयोग ने कई बार सवाल उठाने वाले लोगों को ईवीएम हैक करने के लिए आमंत्रित भी किया है। हालांकि, अभी तक इस आरोप को प्रमाणित नहीं किया जा सका है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। ऐसे में कहा जाता है कि चुनाव के बाद हारने वाली पार्टियां निराशा में वोटिंग मशीन पर सवाल उठाती हैं।

एक नजर चुनाव परिणाम पर...

एमसीडी चुनाव : आम आदमी पार्टी 134, बीजेपी 104, कांग्रेस 9 और 3 पर निर्दलीय।

गुजरात चुनाव : बीजेपी 156, कांग्रेस 17, आम आदमी पार्टी 5 और अन्य को 4 सीटें।

हिमाचल चुनाव : कांग्रेस 40, बीजेपी 25, अन्य 3, यहां आप पार्टी का खाता भी नहीं खुला।

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