सचिन की मौत के बाद नर्सेज-डाक्टर यूनियन आमने सामने, नर्सेज कहा कि दोष समान तो सजा में भेदभाव क्यों, रेजिडेंट बोले सीनियर को बचाकर दी जूनियर की बलि

News: SMS अस्पताल में गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से हुई सचिन शर्मा की मौत के बाद कार्रवाई के विरोध में उपजा विवाद बढ़ता जा रहा है।
सचिन की मौत के बाद नर्सेज-डाक्टर यूनियन आमने सामने, नर्सेज यूनियन ने कहा कि दोष समान तो सजा में भेदभाव क्यों,  रेजिडेंट ने कहा: सीनियर को बचाकर दी जूनियर की बलि
सचिन की मौत के बाद नर्सेज-डाक्टर यूनियन आमने सामने, नर्सेज यूनियन ने कहा कि दोष समान तो सजा में भेदभाव क्यों, रेजिडेंट ने कहा: सीनियर को बचाकर दी जूनियर की बलि
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 News: SMS अस्पताल में गलत ग्रुप का ब्लड चढ़ाने से हुई सचिन शर्मा की मौत के बाद कार्रवाई के विरोध में उपजा विवाद बढ़ता जा रहा है।

नर्सेज और रेजिडेंट डॉक्टर आमने-सामने हो गए हैं। रेजिडेंट जहां सीनियर डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, नर्सेज संगठनों का कहना है कि डॉक्टरों के बचाने के चक्कर में हर बार नर्सेज को निशाना बनाया जा रहा है।

राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक नरेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार इस घटना में लापरवाही मानते हुए जांच कमेटी ने जब एक सीनियर डॉक्टर व दो रेजिडेंट और एक नर्सिंग ऑफिसर को समान दोषी माना है तो फिर सजा में भेदभाव क्यों किया गया है।

डॉक्टरों को APO किया जबकि नर्सिंग ऑफिसर को निलम्बित किया गया है। गत माह मुख्यमंत्री जब निरीक्षण पर आए थे तब भी तीन नर्सिंग ऑफिसर पर ही गाज गिरी थी।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एसीएस से मुलाकात करेंगे।

वहीं, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष खुशीराम मीणा ने कहा कि बिना जांच के नर्सिंग ऑफिसर को निलम्बित किया गया है।

निर्दोष PG छात्रों को सजा देने का आरोप

दूसरी ओर जार्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमावत का कहना है कि आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए निर्दोष पीजी छात्रों को सजा दी गई है।

उनका कहना है कि रेजिडेंट ने सचिन शर्मा का तत्काल इलाज शुरू कर दिया था। संबंधित यूनिट हेड के निर्देशन में सचिन के परिजन को ब्लड के लिए पर्ची थमाई थी और नर्सिंग स्टाफ ने सैंपल निकालकर दिया था।

ब्लड आने पर प्रोटोकॉल के तहत सचिन को चढ़ा दिया गया। इस घटना में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

जो लोग अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पदाधिकारी डॉ. भरत पारीक ने मांग की है कि नए सिरे से उच्च स्तरीय कमेटी गठित हो और फिर से जांच की जाए।

रेजिडेंट का आरोप, मुझे फंसाया गया है

इस केस में एपीओ किए गए रेजिडेंट डॉक्टर दौलत राम ने एक बयान जारी किया है। उसने बताया कि ड्यूटी के दौरान सचिन शर्मा नाम के किसी भी मरीज को ब्लड नहीं दिया गया है।

यह मैं बार-बार कह रहा हूं। प्रशासन ने किसी चहेते को बचाने के चक्कर में मुझे फंसाया है। इसका निर्णय न्यायालय में होगा। मेरे खिलाफ साजिशकर्ताओं को नहीं बख्शा जाएगा।

 

परेशान होते रहे मरीज

दूसरी ओर SMS अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में रेजिडेंट चिकित्सकों का कार्य बहिष्कार लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा।

इससे मरीजों को काफी परेशानी हुई। सबसे ज्यादा दिक्कत ओपीडी और भर्ती मरीजों को हुई। जांच और दवा के लिए मरीजों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

कार्य बहिष्कार के दौरान रेजिडेंट्स चिकित्सकों ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के पोर्च में दो मिनट मौन रखकर बांदीकुई निवासी सचिन शर्मा को श्रद्धाजंलि भी दी। रेजिडेंट का कार्य बहिष्कार सोमवार को भी जारी रहेगा।

सचिन की मौत के बाद नर्सेज-डाक्टर यूनियन आमने सामने, नर्सेज यूनियन ने कहा कि दोष समान तो सजा में भेदभाव क्यों,  रेजिडेंट ने कहा: सीनियर को बचाकर दी जूनियर की बलि
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