धनबाद में कोयले के अवैध खनन में एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों की माैत, 4 शव बरामद‚ कई फंसे

प्रशासन और कोलियरी प्रबंधन की ओर से मलबा हटाने का काम जारी है। मरने वालों में ज्यादातर स्थानीय ग्रामीण और गरीब मजदूर हैं। कुछ और शव मिलने की भी आशंका।
धनबाद में कोयले के अवैध खनन में एक दर्जन 
से ज्यादा मजदूरों की माैत, 4 शव बरामद‚ कई फंसे

Coal Mines File Pic

झारखंड के धनबाद जिले के निरसा इलाके में मंगलवार सुबह तीन जगहों पर कोयले के अवैध खनन के दौरान सुरंग के ढह जाने से 13 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद ईसीएल के गोपीनाथपुर कोलियरी से अब तक चार शव निकाले जा चुके हैं, जबकि एक लाश को कोयला तस्कर लेकर भाग गए।

प्रशासन और कोलियरी प्रबंधन की ओर से मलबा हटाने का काम जारी है। मरने वालों में ज्यादातर स्थानीय ग्रामीण और गरीब मजदूर हैं। कुछ और शव मिलने की भी आशंका है। हादसे के कुछ घंटे बाद धनबाद पुलिस ने ढिलाई बरती।

बाद में जनप्रतिनिधियों के दबाव में पुलिस सक्रिय हो गई। अवैध कोयला खदान से शवों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया गया।

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इसी तरह बीसीसीएल के दहीबाड़ी सी पैच प्रोजेक्ट में भी सुबह करीब सात बजे अवैध खनन के दौरान गिरने से तीन महिलाओं की मौत हो गई। परिजन सभी के शव लेकर फरार हो गए। मरने वाले सभी लोग दिलाबाड़ी के रहने वाले थे। यहां की पुलिस भी घटना से बेखबर रही।

आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट में कोयले के अवैध खनन के दौरान चाल धंस गई

घटना की खबर मिलते ही निरसा विधायक अपर्णा सेनगुप्ता, पूर्व विधायक अरूप चटर्जी और ग्रामीण एसपी रिस्म्मा रामेसन पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद सुबह 5 बजे ईसीएल के कापसरा आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट में कोयले के अवैध खनन के दौरान चाल धंस गई। वहीं तीन लोगों की मौत हो गई। सभी के शव उसके साथियों के साथ भाग गए हैं। मरने वाले सभी लोग बाहर के थे। वे लोग यहां रहते थे और कोयला काटने का काम करते थे।

कोयले की एक टोकरी काटने के 130 रुपये मजूदरी
एक मजदूर खदान में कोयले की एक टोकरी 130 रुपये में बेचता है। एक दिन में, एक मजदूर कोयले की कम से कम 20-30 टोकरियाँ कोयला निकालता है। इन दिनों हजारों की संख्या में अन्य जगहों से लोग कोयला खनन के लिए मुगमा क्षेत्र में काम कर रहे हैं। जिसकी पहचान कोयला खनिकों के पास ही रहती है। ऐसे में जब हादसा होता है तो मजदूरों को लाने वाले कोयला कारोबारी चुप रहते हैं।
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क्या था मामला - सीएल मुगमा क्षेत्र के कापसरा आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट में कोयला खदानों में अवैध रूप से उत्खनन के दौरान गिरे तीन लोगों की मौत के बाद मंगलवार की सुबह भगदड़ मच गई। आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट में अचानक सन्नाटा पसरा रहा। मरने वाले सभी लोग दूसरे जिले के थे। हर दिन की तरह मंगलवार को भी सैकड़ों लोग कापसरा आउटसोर्सिंग परियोजना में कोयला खदान के लिए उतरे थे। सुबह करीब पांच बजे लोग रावण सीढ़ी नामक स्थान के पास मुहाना के अंदर कोयला काट रहे थे। इसी बीच अचानक गति गिर गई। इसकी चपेट में आने से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। कोयला काट रहे उनके साथियों ने सभी के शवों को मलबे से बाहर निकाल लिया। इससे मरने वालों का नाम और पता नहीं चल सका है। जानकारी के अनुसार ईसीएल प्रबंधन को घटना की हादसे का पता हाने के बावजूद वो कुछ भी बोलने से बच रहा है। बहरहाल घटना की सूचना मिलते ही अग्यारकुंड प्रखंड की अंचल अधिकारी अमृता कुमारी कापसरा आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट पर पहुंची।

बाहर से मजदूरों को बुला कर कराया जाता है अवैध खनन

कापासारा आउटसोर्सिंग परियोजना में कोयले के अवैध धंधेबाज झारखंड के मधुपुर, जामताड़ा, विद्यासागर, चित्तरंजन, करमाटांड़, मदनपुर, हीरबाध, कंचनडीह और बंगाल के मेदिनीपुर, वीरभूम, दुर्गापुर, आसनसोल, नियामतपुर, कुल्टी, रघुनाथपुर, पुरुलिया और मुर्शिदाबाद आदि जिले से मजदूरों को मंगवाकर अवैध खनन कराते हैं। अवैध खनन कराने वाले सभी धंधेबाज स्थानीय हैं, जो इंदिरा नगर बस्ती, स्टेशन रोड मुगमा, भालुकसुंधा, चपरासी धौड़ा, बंगाल-बिहार और सुभाष कालोनी में रहते हैं।

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